Thursday, 8 May 2008

खो न जाए ये क्रिकेट कहीं पर


(नीचे लिखीं लाइनें पढ़ने से पहले
फिल्म तारे जमीन पर के टाइटल गीत
की धुन को कंठस्थ करना जरूरी है)

देखों इन्हें ये हैं आईपीएल की टीमें

बूढ़ों युवाओं का संगम ये टीमें

लाखों करोड़ों का सौदा ये टीमें

क्रिकेट के नाम पर धंधा हैं टीमें

खो न जाए ये क्रिकेट कहीं पर

भज्जी श्रीसंत को थप्पड़ मारे

दोनों एक ही टीम के तारे

और गांगुली भड़के अंपायर पे जा चढ़े

छोटे चियर गर्ल्स के कपड़े

प्रीति के जूनियरों से लफड़े

कोच-प्लेयर-अंपायर सब हैं फंसे पड़े

चली विवादों की लहर है

हुआ आधा अभी सफर है

मोटे पैसों का असर है..

खो न जाए ये क्रिकेट कहीं पर..

-संजय गोस्वामी

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Tuesday, 6 May 2008

कर्मचारी की अभिलाषा

इस रचना का श्रद्धेय माखनलाल चतुर्वेदी की अमर कृति
पुष्प की अभिलाषा से किसी तरह का कोई संबंध नहीं है।
अगर कोई संबंध पाया जाता है
तो इसे महज एक संयोग कहा जाएगा।

चाह यही की बॉस से

अपने पैसे बढ़वाऊं

चाह यही की गद्दे वाली

कुर्सी पर बैठूं, इठलाऊं

चाह यही कि सेक्रेट्री को

फोन करूं, अंदर बुलाऊं

चाह यही कि कॉलर में

मैं भी एक टाई लगाऊं

चाह यही कि किसी अर्जी पे

मैं भी इक चिड़िया बिठाऊं

चाह यही कि मिलने वालों को

घंटों बाहर बैठाऊं

चाह यही कि मेरे घुसते ही

सबको खड़ा मैं पाऊं

चाह यही कि कुछ अपने

चमचे मैं भी बनाऊं

मुझे दोस्त मत देना गाली

ऐसे पद पर गर जाऊं बैठ

रात दिन सब धोक लगाकर

रखना चाहेंगे मुझको सैट


- संजय गोस्वामी


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Monday, 5 May 2008

देखो देखो क्या ये पेट है

बुश महोदय जो कह गए सो कह गए।
चलो, बच्चों की जुबान से ही उन्हें कुछ समझा दें।

(नीचे लिखीं लाइनें पढ़ने से पहले
फिल्म तारे जमीन पर के गीत बम बम बोले
की धुन को कंठस्थ करना जरूरी है)

देखो देखो क्या ये पेट है

खाद्यान्नों का या घड़ा कोई

सारी दुनिया भूखी बैठी है

पेट भर रहे इंडियन सभी..

बुश जैसा बोले है लगे उससे ऐसा ही

सोचेगी यही दुनिया

खाना अपना लाओ, भारत से मिलाओ

दुनिया को बुलाओ

चलो, चलो, चलो कंपेयर कर लें

हम कम खाके भी मस्ती में डोले

ज्यादा खाके भी अमरीकी ये बोलें रे

- ओय हमपे ढोले


- संजय गोस्वामी
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